काजू की खेती कैसे की जाती है ? cashew nut cultivation in india

काजू की खेती कैसे की जाती है ? cashew nut cultivation in india

आज  हम लोग बात करेंगे काजू की खेती कैसे की जाती है ।

जैसा की  आप सभी जानते हो की काजू तकरीबन ₹900/- किलो से लेकर 1100/- रूपए प्रति किलो

 तक बिकता है लेकिन झारखण्ड के जामताड़ा जिला में काजू सस्ता होने की कहानी कुछ और  है । 

वहां के पूर्व उपायुक्त कृपानंद झा को काजू के शौकीन थे ‌।  वह चाहते थे कि जामताड़ा में काजू के बाग

 लग जाए तो वे ताजा और सस्ता काजू खा सकेंगे।


काजू की खेती ,cashew nut cultivation in india

 

उन्होंने उड़ीसा के काजू के किसानों से संपर्क साधा । अपने जिले में उपयुक्त मिट्टी का चुनाव किया 

और उसके बाद यहां भी काजू की खेती पंचायती जमीन पर होने लगी। पर उनके जाने के बाद इनकी 

देखभाल करने वाला कोई नहीं रहा। आसपास के लोग अपनी मनमर्जी से इसको तोड़ते और बेचते रहे

  और अब हालात ऐसे हो गए कि अब वहां इनको कोई पूछने वाला नहीं है। 

 बिहार में काजू की खेती हो सकती है तो उसके लिए किसानो  को क्या क्या करना पड़ेगा ? तो आइए 

इस लेख में जानते हैं काजू की खेती से जुड़ी हुई सारी जानकारी ।

कुछ प्रश्न मन में होते हैं जैसे --

काजू का पौधा कैसा होता है , काजू का पेड़ कहाँ पाया जाता है , काजू का पेड़ कैसे लगाएं ,काजू का 

बाग कैसे लगाएं ,काजू का बीज कहाँ मिलेगा ,किस मिटटी के प्रकार काजू की फसल उगने के लिए 

सबसे उपयुक्त है | इन सबकी जानकारी इस लेख में है। 

काजू एक प्रमुख नगदी (अच्छा प्रॉफिट है ) फसल है | जिसकी  केरल , महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक , 

तेलंगाना , आंद्रप्रदेश और उड़ीशा में खेती की जाती है | पश्चिम बंगाल, छत्तीसगड़, गुजरात में इसे 

कुछ क्षेत्रों में उगाया जाता है | 


काजू की खेती ,cashew nut cultivation in india

शानदार  नाश्ता होने के साथ साथ काजू को आइसक्रीम   , और मिठाईयो में भी इस्तेमाल किया 

जाता है | विवाह -शादियों में इसका जम कर प्रयोग होता है। 

इसमे प्रोटीन अधिक और शक्कर कम होने के कारण स्वस्थय वर्धक भोजन के रूप में अधिक 

इस्तेमाल किया जाता है |

फ़िलहाल काजू बागों का ज्यादातर  विस्तार बीजों से किया गया है, जो की अधिक पैदावार नहीं देते। 

 इसलिए इसकी खेती वैज्ञानिक तकनीक से करनी चाहिए| ताकि इसकी बागवानी से अच्छा उत्पादन 

प्राप्त किया जा सके |

 काजू की बागवानी वैज्ञानिक तरीके से कैसे करें --

काजू की खेती के लिए जलवायु----

 काजू की गर्म एवं उष्ण जलवायु में अच्छी पैदावार होती है | जिन क्षेत्रों में पाला पड़ता  है या लम्बे 

समय तक सर्दी रहती है  है, वहाँ पर इसकी खेती अच्छी नहीं होती | 600 मीटर ऊँचाई वाले क्षेत्र जहाँ 

पर तापमान 23 डिग्री सेंटीग्रेट से ऊपर रहता है, काजू की अच्छी उपज होती है | 500 से 4000 

मिलीमीटर सालाना वर्षा वाले क्षेत्र इसके लिए अच्छे माने गये हैं|

काजू की खेती के लिए भूमि का चयन----

काजू को अनेक प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है| परन्तु समुद्र तटीय प्रभाव वाले भू-भाग लाल

 एवं लेटराइट मिट्टी (इस मिट्टी में लोहा, ऐल्युमिनियम और चूना  की मात्रा अधिक होती  है। लेटेराइट

 मिट्टी में आयरन ऑक्साइड और पोटाश की मात्रा अधिक होती है। ) वाले भू-भाग इसकी खेती के लिए

 ज्यादा उपयुक्त होते हैं | उत्तर भारत के भी कुछ क्षेत्र काजू की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त पाये 

गये हैं| क्योंकी कुछ उत्तर क्षेत्रों की मिट्टी एवं जलवायु काजू की खेती के लिए अच्छी होती  है|

काजू की उन्नत किस्में----

विभिन्न राज्यों के लिए काजू की उन्नत किस्मों की पहचान  भाकृअनुप – काजू अनुसंधान 

निदेशालय, पुत्‍तूर द्वारा की गई है | इसके अनुसार वैसे तो उत्तरी राज्यों के लिए किस्मों की 

संस्तुति नहीं है | परन्तु जो किस्में उड़ीसा, आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, बंगाल एवं कर्नाटक के लिए 

उपयुक्त है | उनकी खेती उत्तर - पूर्वी राज्यों में भी की जा सकती है |

 काजू की प्रमुख किस्में -----

vegurla - 4, ullal - 2, ullal- 4, B P P - 1, B P P - 2, T- 40 आदि है|

खेत की तैयारी----

काजू की खेती के लिए सबसे पहले  खेत की  3 से 4 बार गहरी जुताई कर दें | पेड़ों  की जड़ों को निकाल

 कर खेत को बराबर कर दें | जिससे नये पौधों को शुरुवात  में पनपने में कोई परेशानी  न हो| काजू के 

पौधों को 7 से 7 मीटर की दूरी पर वर्गाकार लगाते हैं| खेत की तैयारी के बाद अप्रैल से मई के महीने में 

गड्ढों के निशान लगाकर  3 X 3 फुट  आकार के गड्ढे तैयार कर लेते हैं|

अगर जमीन कठोर है, तो गड्ढे के आकार को  बढ़ाया जा सकता है | गड्ढों को 20 से 25 दिन तक 

खुला छोड़ने के बाद 10 से 15 किलोग्राम गोबर की खाद या कम्पोस्ट, 2 किलोग्राम राक फॉस्फेट या 

डी ए पी के मिश्रण को गड्ढे की ऊपरी मिट्टी में मिलाकर भर देते हैं |  अधिक सघनता से बाग लगाने

 के लिए पौधों की दूरी 5 x 5 मीटर रखते हैं | 

काजू की पौधे तैयार करना-----

काजू के पौधों को कलम  विधि से तैयार किया जा सकता है | भेट कलम से भी पौधों को तैयार कर 

सकते हैं | पौधा तैयार करने का उपयुक्त समय मई से जुलाई का महीना होता है | सबसे अच्छा है की

 किसान भाईओं को  भाकृअनुप – काजू अनुसंधान निदेशालय, पुत्‍तूर की वेबसाइट पर हेल्पलाइन 

नंबर से किसी सर्टिफाइड नर्सरी का पता करें और वहीँ से पौधे लें। 

काजू की पौध रोपण-----

काजू के पौधों को वर्षा रितु में ही लगाने से अच्छी सफलता मिलती है | तैयार गड्ढों में पौधा लगाने  

के बाद थाले बना देते हैं तथा थालों को  समय-समय पर निकाई-गुड़ाई करते रहें और खरपतवार 

निकलते रहें | जल संरक्षण के लिए थालों में सूखी घास (मल्चिंग) भी बिछाते हैं |

काजू की खेती के लिए खाद एवं उर्वरक-----

प्रत्येक वर्ष पौधों को 10 से 12 किलोग्राम गोबर की सड़ी खाद, के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों की 

भी उपयुक्त मात्रा देनी चाहिए |पहले साल  में 250 ग्राम यूरिया, 200 ग्राम रॉक फास्फेट, 60 ग्राम 

म्यूरेट ऑफ पोटाश MOP प्रति पौधा की दर से दें | दूसरे साल  इसकी मात्रा दोगुना कर दें और तीन 

साल के बाद पौधों को 800 ग्राम यूरिया, 500 ग्राम रॉक फॉस्फेट एवं 250 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश 

प्रति वर्ष मई से जून और सितम्बर से अक्टूबर के महीनों में आधा-आधा बांटकर देते रहें |

पौधों की काट-छांट-----

काजू के पौधों को शुरुवात में अच्छा आकार  देने की जरूरत होती है | इसलिए सही काट-छाँट से पौधों 

को अच्छा आकार देने के साथ-साथ फसल तोड़ाई के बाद सूखी, रोगग्रसित  एवं कीट ग्रसित शाखाओं 

को काटते रहें |

काजू में पौध संरक्षण-----

काजू में ‘T MOSQUTO BUG ’ की प्रमुख समस्या होती है | इसके वयस्क तथा नवजात शिशु नई 

कोपलों, फूलों, फलों से रस चूसकर बहुत नुकसान पहुँचाते हैं | कभी-कभी इसकी समस्या इतनी 

ज्यादा हो जाती है, कि इसके नियंत्रण के लिए पूरे क्षेत्र में एक साथ छिड़काव  करना पड़ता है |

 इसके उपचार के लिए एक स्प्रे चक्कर बनाया गया है जो इस प्रकार है, जैसे-

पहला स्प्रे- कल्ले आते समय (दवाई कृषि वैज्ञानिक की सलाह से डालें   )

दूसरा स्प्रे- फूल आते समय 

तीसरा स्प्रे- फल लगते समय

काजू की तोड़ाई एवं पैदावार ----

काजू में पूरे फल की तोड़ाई नहीं की जाती है | केवल जमीन पर गिरे हुए नट को इकट्ठा किया जाता है 

और इसे धूप में सुखाकर , जूट के बोरों में भरकर , नमी रहित स्थान पर रख दिया जाता है | प्रत्येक 

पौधे से लगभग 9 से 10 किलो काजू प्रतिवर्ष प्राप्त होते है | इस प्रकार एक हेक्टेयर में लगभग 12 से 

16 क्विंटल काजू प्राप्त होते हैं | जिनसे फ़ूड प्रोसेसिंग  के बाद खाने योग्य काजू प्राप्त होते है |


लेख पढ़ने के लिए धन्यवाद -आपका दिन शुभ हो 

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ROHTASH MEHLA 

और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें ---

कौन सी खेती में किसान को सबसे ज्यादा फायदा दिखता है ? small business ideas for farmers 

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