स्टीविया की खेती कैसे करें ? Stevia Farming ,Stevia in hindi

 स्टीविया की खेती कैसे करें ? Stevia Farming ,Stevia in hindi
किसानों की आमदनी बढ़ाने में ये फसल घोल सकती है भरपूर मिठास

डॉयबिटीज़/ मधुमेह पीड़ितों के लिए खाद्य उत्पाद, पेय पदार्थ और 

मिठाइयों में भी स्टीविया की सूखी हुई पत्तियों का प्रयोग होता है | इसके 

पौधे से जो पाउडर तैयार किया जाता है वो चीनी के मुकाबले 300 गुना   

ज्यादा मीठी है। 


स्टीविया क्या है ,stevia plant called in Hindi

दुनिया भर में डॉयबिटीज़/ मधुमेह रोगियों का बढ़ना भले ही एक अच्छी 

खबर न हो लेकिन किसानों के लिए यह आय बढ़ाने का एक बेहतर मौका हो

 सकता है।  डॉयबिटीज़/ मधुमेह के उपचार के लिए स्टीविया ,मधुपत्र या 

मीठी तुलसी (स्टीविया) की पत्तियों की मांग बढ़ रही है।

  इसका मतलब यह है कि किसान स्टीविया की खेती करके अपनी 

आमदनी बढ़ा सकते हैं। 

कुछ प्रश्न हैं किसान भाइयों के 

 स्टीविया की खेती कैसे करें  , स्टीविया का बाजार भाव क्या है ,stevia rate
 
,स्टीविया की कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग ,राजस्थान में स्टीविया की खेती ,उत्तर 

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बीज का रेट ,स्टीविया कहाँ बेचें ,What is the stevia plant called in 

Hindi?स्टीविया की मंडी इन सब का जवाब इस पोस्ट में देने की कोशिश 

की है ,कोई सवाल हो तो मोस्ट वेलकम ,massage  करें जवाब जरूर दिया 

जायेगा2023 तक स्टीविया के बाजार में करीब 1600 करोड़ रुपए की 

बढ़ोतरी होने का अनुमान है।  इसे देखते हुए national medicinal plants 
board (एनएमपीबी) ने किसानों को स्टीविया की खेती पर 20 फीसदी 

सब्सिडी देने की घोषणा की है। 

इंडियन AGRICULTURE UNIVERSITY के शोध में ये बात सामने आयी

 है कि स्टीविया की पत्तियों में प्रोटीन और फाइबर अधिक मात्रा में होता है।

  कैल्शियम और फास्फोरस से भरपूर होने के साथ इन पत्तियों में कई तरह

 के खनिज भी होते हैं।  इसलिए इनका उपयोग डॉयबिटीज़/ मधुमेह रोगियों 

के लिए किया जाता है।

 दवा कंपनियों में भी बड़े पैमाने पर स्टीविया की मांग होती है। 

सरकार स्टीविया की खेती को बढ़ावा देने के लिए 20 फीसदी सब्सिडी दे रही

 है।  किसानों को इसके लिए जागरूक भी किया जा रहा है।  ये स्वास्थ्य के 

अलावा आर्थिक रूप से भी फायदेमंद है। 

चीन के बाद भारत में सबसे ज्यादा डॉयबिटीज़/ मधुमेह के मरीज है।  चीन 

में डॉयबिटीज़/ मधुमेह से पीड़ितों की संख्या 12 करोड़ तो वहीं भारत में ये 

संख्या सात करोड़ के आसपास है।सबसे तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से 

एक है डॉयबिटीज़/ मधुमेह. भारत में छोटे और बड़े व्यापारियों ने Indian 

Stivia associationकी भी स्थापना की है।  जिसमें लगभग 650 उपक्रम 

शामिल हैं।  एसोसिएशन स्टीविया की खेती को बढ़ावा देने  का प्रयास कर 

रहा है।

  अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्टीविया के सत् (extract) की कीमत 5.5-6.5 

लाख प्रति 100 किलो है । 

स्टीविया की खेती मूल रूप से दक्षिण अमरीका में होती है। 

 इसके अलावा इसकी खेती कोरिया,पराग्‍वे, ताइवान,जापान, 

अमेरिका आदि देशों में होती है।  भारत में सन 2000 के आसपास  इसकी 

खेती शुरू हुई थी।  फ़िलहाल  इसकी खेती पुणे, बंगलोर,रायपुर, इंदौर व 

उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में शुरू हुई है। 

राष्ट्रीय औषधीय पौधा बोर्ड के सलाहकार डॉ सुनील सिंह बताते हैं - 

स्टीविया की खेती को बढ़ावा देने के लिए  किसानों को जागरूक भी किया 

जा रहा है।  ये स्वास्थ्य के अलावा नगदी फसल के रूप में भी फायदेमंद है। 

 स्टीविया की पत्तियों की कीमत थोक में करीब 270 रुपए किलो तथा खुदरा

 में यह 450-550 रुपए प्रति किलो तक होती है। स्टीविया के पौधों से हर 

तुड़ाई में प्रति एकड़ 2500 से 2700 किलो सूखी पत्तियां मिल जाती हैं।  यह 

देखते हुए किसान इनको उगाकर खासी कमाई कर सकते हैं। 

भारतीय किसानों द्वारा स्टीविया को मीठी तुलसी भी कहा जाता है। 

 इसकी मिठास चीनी से 300 गुना ज्यादा होती है।  ये ग्लाइकोसाइड नामक

 यौगिकों के एक वर्ग से आती है ।  

चीनी की तरह यह कार्बन, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन का मिश्रण है।  हमारा 

शरीर इसको पचा नहीं सकता लेकिन जब इसे खाया जाता है तो यह कैलोरी

 में नहीं जुड़ता है, केवल मिठास स्वाद देता है। 

अब एक नजर डालते हैं इसके नफा नुक्सान पर 

  इसके बारे में हरियाणा के किसान धर्मबीर कंबोज बताते हैं की  "इसकी 

खेती में अच्छी बात ये है कि इसके पौधे को गन्ने की अपेक्षा 6% तक कम 

पानी की जरूरत होती है।  

लेकिन बुरी खबर ये है कि एक एकड़ की खेती के लिए आपको कम से कम 

42000 पौधे लगाने होंगे।  

इसमें लगभग 100,000 रुपए का खर्च आएगा।  

गन्ने की अपेक्षा एक किसान स्टीविया की खेती से 35 से 40 गुना ज्यादा 

कमासकता है।  एक पौधे से किसान 125 रुपए तक की कमाई एक बार में 

आसानी से हो सकती है। 

 एक बार लगाने के बाद कम से कम पांच साल किसान इसकी खेती से 

अच्छा लाभ कमा सकते हैं। 

धर्मबीर कंबोज आगे बताते हैं कि उन्होंने मीठी तुलसी /स्टीविया के बारे में 

नौनी विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश में सुना था।  ये बात 1999 की है। 

 इसके बाद अमेरिका फूड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने स्टीविया को मंजूरी दी। दो
 
साल बाद मैंने केरला कीएक नर्सरी से पौधे लाए और इसकी खेती शुरू की। 

बढ़ रही हैं की स्टीविया मांग

भारतीय बाजार में इस समय स्टीविया से बने हुए  100 से ज्यादा प्रोडक्ट 

मौजूद हैं।  पेप्सीको,मदर डेयरी,  अमूल, कोका कोला  जैसी कंपनियां बड़ी 

मात्रा में स्टीविया बना रही हैं।  मलेशिया की कंपनी PURE CIRCLE 

स्टीविया पर ही काम करती है।  कंपनी ने भारत में बीते  पांच साल में 1200

 करोड़ का कारोबार डाबर के साथ किया है। 

 फ्रूटी और हल्दीराम स्टीविया प्रोडक्ट बाजार में उतार चुका है। 

 स्टीविया का ग्लोबल मार्केट इस समय लगभग 5000 करोड़ रुपए का है। 

भारत में अन्य देशों की तुलना में स्टीविया की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही 

है।  बाजार में देखते हुए किसान इसकी खेती से बढ़िया मुनाफा कमा सकते 
हैं। 
इलाहाबाद के युवा किसान हिमांशु शुक्ला कई सालों से स्टीविया की खेती 

कर रहे है।  वे इसके बारे में बताते हैं "इस फसल की सबसे अच्छी बात यै है 

कि इसमें कोई रोग नहीं लगता। 

 किसान एक एकड़ में पांच से छह लाख रुपए की कमाई आराम से कर 

सकते हैं। इसकी खेती में एक और फायदा ये है कि इसमे सिर्फ देसी गोबर 

खाद से ही काम चल जाता है। 

स्टीविया का पौधा कलमों से किया जाता है , जिसके लिए 12 से 15 

सेंटीमीटर लम्बी कलमों को काटकर पोलिथिन की थैलियों में तैयार किया 

जाता है।  tissue कल्चर से भी पौधों को तैयार जाता है 

जो आमतौर पर 5-6 रुपए प्रति पौध मिलती हैं।  

सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसकी बुवाई सिर्फ एक बार की जाती है और 

सिर्फ june और december महीने को छोड़कर सभी महीनों में इसकी बुवाई 

होती है।  एक बार फसल की बुवाई के बाद पांच साल तक इससे फसल 

मिलती रहती हैं।  सालभर में हर तीन महीने बाद इससे फसल ले  सकते हैं।

एक साल में कम से कम चार बार पत्तों की कटाई की जा सकती है। 

स्टीविया का रोपन बेडस , डोलों / मेड़ों पर किया जाता है , जिसके लिए 

लगभग 8 से 10 इंच ऊंचे बेड्स पर पौधे पंक्ति से पंक्ति 45 सेंटीमीटर तथा 

पौधों से पौधे 15 सें.मी. की दूरी पर लगाते हैं।



स्टीविया क्या है ,stevia plant called in Hindi

  लगाने का उपयुक्त समय फरवरी से मार्च है।  स्टीविया एसोसिएशन के 

MD और CO सौरभ अग्रवाल बताते हैं "ज्यादा जानकारी ना होने के कारण
 
किसान अभी इसको जल्दी अपना नहीं रहे हैं। 

 जबकि इसकी खेती से लाभ ही लाभ है। 

 इसमें नुकसान की गुंजाइश बहुत ही कम है।  ये मुनाफा देने वाली फसल है,

 किसानों को इसे जरूर अपनाना चाहिए। 

आपका दिन शुभ हो -अच्छा लगा तो शेयर करो 

धन्यवाद  किसान दोस्तों 

रोहताश मेहला

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